रिपोर्ट :- अजय रावत

गाज़ियाबाद :- बसंत पंचमी का शुभ पर्व मनाया जाएगा इस दिन मां सरस्वती का पूजन उत्सव के साथ-साथ वसंत रखने का भी अपना महत्व होता है। क्योंकि ठीक 40 दिन के बाद होली का पर्व होता है। ग्रामीण परंपराओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जिस दिन व समय बसंत रखा जाता है , उस समय जो भी मौसम होता है ,पूरे 40 दिन तक रहता है। बसंत रखने के लिए शुभ मुहूर्त स्थिर लग्न में 9:53 बजे से 11:57 बजे तक रहेगा।

ग्रामीण अंचलों में गांव में बसंत पंचमी के दिन ऐसे स्थान चिन्हित किए जाते हैं जहां पर होलिका रखी जाती है और बसंत पंचमी के दिन उसे स्थान को शुद्ध करके रंगोली बनाकर  सुंदर स्वास्तिक बनाते हैं और उस पर एक दण्ड गाड़ देते हैं। 40 दिन तक  गांव के युवा वर्ग व  बच्चे इस स्थान पर विभिन्न प्रकार की लकडियां और उपले आदि एकत्रित करते रहते हैं और होली के दिन उसी को होलिका दहन के रूप में दहन किया जाता है ।यह परंपरा ग्रामीण अंचलों में अभी   है । लेकिन शहरों में तो स्थान की कमी के कारण लुप्तप्राय: हो रही है।

वसंत रखते समय स्वस्तिवाचन और मंगलाचरण आदि के मंत्र का उच्चारण किया जाता है ।
क्योंकि  इस समय से वसंत ऋतु  आरंभ हो जाती है और बसंत ऋतु में प्रकृति में विभिन्न परिवर्तन दृष्टिगोचर होते हैं।
पौधों में नवीन पत्तियां, पुष्प आदि आ जाते हैं ।खेतों में सरसों के पीले पीले फूलों से प्रकृति पुष्पित और पल्लवित हो उठती है ।चारों ओर  सौंदर्य और आकर्षण दिखाई देता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी ग्रह प्रकृति के अनुकूल होते है।प्राय: मंगल और शुक्र साथ होते हैं जो प्रेम के कारक होते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ रंगों का भी आकर्षण इस मौसम में बढ़ जाता है। पलाश के फूलों से विभिन्न प्रकार के रंग तैयार किए जाते हैं जो स्वास्थ्य को भी हानि नहीं पहुंचाते हैं। लेकिन आजकल आर्टिफिशियल रंगों का बहुत प्रचलन हो गया है। इसलिए सावधान रहना चाहिए।


पंडित शिवकुमार शर्मा, ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु कंसलटेंट, गाजियाबाद
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