रिपोर्ट :- सिटी न्यूज़ हिंदी
गाजियाबाद :-
प्रदेश में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बलदेव राज शर्मा ने अपनी स्वर्गीय पत्नी से जुड़े हुए अनुभवों को बताया, आज से 2 वर्ष पूर्व हम सब से स्नेह प्यार एवं आदर करने वाली ममतामई मां मेरी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती कृष्णा शर्मा अचानक 24 अगस्त 2018 की दोपहर को अपने बच्चों को रोते बिलखते छोड़कर ईश्वर के धाम पर चली गई
मेरी और श्रीमती कृष्णा की शादी 22 फरवरी 1958 को हुई थी उनके पिता स्वर्गीय पंडित सोहन लाल जी शास्त्री परम विद्वान थे और देश विभाजन के पूर्व लालपुर संस्कृत महाविद्यालय में प्रधानाचार्य थे श्रीमती कृष्णा के साथ मेरा सफल वैवाहिक जीवन 60 वर्ष 6 महीने तक रहा इस दौरान मैंने महसूस किया कि वह कोई साधारण महिला नहीं थी बल्कि उसमें एक विशेष पुण्य आत्मा का वास था जो सभी से प्यार करती थी उन्होंने अपनी पांचो लड़कियों उमा ,रामा ,नीरा ,मीनाक्षी एवं अंकुश तथा अपने बेटे विपुल को अच्छे संस्कार दिए वह एक धार्मिक महिला थी उनके पुण्य प्रताप से ही उनके पांचों दमाद हर्षवर्धन शांडिल्य, राकेश शर्मा, सुनील कौशिक, कुलदीप शर्मा एवं कमल कांत शर्मा एडवोकेट बहुत ही अच्छे एवं संस्कारी मिले एवं उनकी बहू श्रीमती शातिल शर्मा भी अच्छी सेवा भाव वाली मिली ।
पूर्व प्रधानमंत्री भारत रतन स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई का देहांत 16 अगस्त 2018 को हुआ था आदरणीय अटल जी का हम से बहुत लगाव था मेरी बड़ी लड़की उमा की शादी पर भी अटल जी आए थे। जब मान्यवर राजनाथ सिंह लखनऊ के गोमती नदी में अटल जी के अस्थि कलश परवाह करने के लिए 23 अगस्त को लखनऊ जा रहे थे तो श्रीमती कृष्णा ने मुझसे कहा आपको भी लखनऊ जाना चाहिए मुझे 23 अगस्त के प्रातः 7:00 बजे अपने हाथ से चाय पिला कर गाड़ी में छोड़ने बाहर आई और खुशी खुशी मुझे विदा किया यही मेरी उनके हाथ से बनी अंतिम चाय थी परंतु मुझे क्या पता था कि आज जिस उत्साह के साथ मुझे विदा कर रही हैं वह जब मैं लखनऊ से वापस आऊंगा तो आसुओं से मुझे उनका पार्थिव शरीर को देखना पड़ेगा
परंतु ईश्वर के विधान के सामने हम सब नतमस्तक हैं उन्होंने एक अच्छा जीवन जिया एक बार राजनाथ सिंह सह परिवार प्रातः 10:00 बजे नाश्ते पर हमारे घर कवि नगर में आए तो उन्होंने कहा कि भाभी जी आज हम आपके हाथ के आलू के तंदूरी पराठे खाएंगे श्रीमती जी ने फौरन तंदूर जलवा या और हम सबको गरम गरम पराठे खिलाएं जब हम नाश्ता कर चुके थे तो मैं पीछे आंगन में चला गया तो वहां मैं क्या देखता हूं कि वह मान्यवर जी की पत्नी श्रीमती सावित्री सिंह को तंदूर में पराठा लगाना सिखा रही हैं इस घटना को आज भी मान्यवर जी याद करते हैं।
वह अतिथि सेवा से बहुत खुश होती थी घर में जो कोई भी आता था तो उन्हें कभी भी खाली चाय नहीं पिलाती थी बल्कि कुछ ना कुछ नाश्ता जरूर रखती थी उनकी अतिथि सेवा को आज भी हमारे नेता एवं कार्यकर्ता बहुत याद करते हैं।
60 वर्षों की यादें तो बहुत हैं अब तो केवल उनकी यादें ही शेष रह गई है मुझे आशा एवं पूर्ण विश्वास है ईश्वर ने उन्हें अपने धाम में वास दिया होगा मैं अपने परिवार की ओर से एवं इष्ट मित्रों की ओर से उनको अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं मुझे आशा है उनका आशीर्वाद परिवार पर सदैव बना रहेगा।
ओम शांति शांति शांति।