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एडवोकेट अरविंद तेवतिया की कलम से 🖋️
गाजियाबाद :-
संयुक्त व्यापार मंडल के मेरठ मंडल अध्यक्ष अरविंद तेवतिया ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के नाम पर कश्मीर के चर्चित चौक लाल चौक का नाम महाराजा रणजीत सिंह चौक रखना चाहिए
अरविंद तेवतिया बताते हैं कि महाराजा रणजीत सिंह पूरे पंजाब प्रांत के राजा थे गौरतलब है कि उस समय राजस्थान हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश जम्मू पंजाब
एवं पंजाब का वह हिस्सा जो आज पाकिस्तान में है यह सब पंजाब प्रांत का हिस्सा हुआ करता था
महाराजा रणजीत सिंह को शेरे पंजाब कहा जाता है रणजीत सिंह एक ऐसे महान योद्धा थे जिन्होंने पूरे पंजाब प्रांत को एक सूत्र में पिरो कर रखा उन्होंने अपने जीते जी अंग्रेजों को कभी भी अपने साम्राज्य के पास तक फटकने नहीं दिया
मैं आपको सन 1812 की बात बताता हूं उस समय पंजाब प्रांत के महाराजा रणजीत सिंह का पूरे पंजाब प्रांत पर एक छात्र राज्य था उस समय महाराजा रणजीत सिंह ने अपने प्रांत का विस्तार करने लिए कश्मीर को अपने साशन छेत्र से जोड़ना चाहते थे तथा कश्मीर को सूबेदार शासक अता मोहम्मद के शिकंजे से कश्मीर को मुक्त कराने का अभियान शुरू करना था इस अभियान से व महाराजा रणजीत सिंह की ताकत से डर कर अता मोहम्मद कश्मीर छोड़कर भाग खड़ा हुआ था
कश्मीर मुक्त अभियान के पीछे महाराजा रणजीत सिंह का एक मुख्य कारण यह भी था अता मोहम्मद ने महमूद शाह के द्वारा पराजित किए गए शाहशुजा को शेरगढ़ के किले में कैद करके रखा था उसे कैद खाने से मुक्त कराने के लिए उसकी बेगम वफा बेगम जिसका नाम था वह महाराजा रणजीत सिंह के पास आकर प्रार्थना करती है और कहती है कि वह मेरे पति शाह शुजा को अता मोहम्मद की कैद से मुक्त कराने का कार्य करें इस एहसान के बदले में वह बेशकीमती कोहिनूर हीरा मैं आपको भेंट में दूंगी
मैं आपको बता दूं यह वह कोहिनूर हीरा था जिसको हड़पने के लिए अहमद शाह अब्दाली के पुत्र जमान शाह ने स्वयं उसके भाई महमूद शाह की उसकी आंखें निकलवा दी थी
महाराजा रणजीत सिंह स्वंम चाहते थे कि कश्मीर को अता मोहम्मद से मुक्त किया जाए संयोग पूर्ण कश्मीर को अता मोहम्मद से आजाद करा लिया गया और वफ़ा बेगम के पति शाह शुजा को रिहा करा कर वफा बेगम के पास लाहौर भेज दिया गया
किंतु वफा बेगम अपने वादे के बाबजूद भी कोहिनूर हीरा महाराजा रणजीत सिंह को भेंट करने में देरी करती रही जब कई महीने बीत गए तब महाराजा रणजीत सिंह ने शाह शुजा के पास कोहिनूर हीरे के बारे में संदेश लाहौर भेजा तो वफा बेगम और शाह शुजा दोनों ही बहाने बनाने लगे
महाराजा रणजीत सिंह ने चेतावनी दी कि अगर उन्होंने कोहिनूर हीरा उन्हें नहीं दिया तो उसका अच्छा परिणाम नहीं होगा महाराजा रणजीत सिंह की चेतावनी के बाद शाह शुजा और उसकी बेगम ने नकली हीरा भेट कर दिया जोहरीओ के परीक्षण से पता चला की उनके द्वारा भेजा गया हीरा नकली है यह देखकर महाराजा रणजीत सिंह क्रोधित हो उठे वर्ष 1813 की 1 जून की बात है जब महाराजा रणजीत सिंह ने शाह शुजा से कोहिनूर हीरे के बारे में पूछा और महाराजा रणजीत सिंह पूरे दलबल व सेना के साथ शाह शुजा के पास लाहौर पहुंच गए और वहां से उन्होंने वह कोहिनूर हीरा प्राप्त कर लिया
अब बेशकीमती कोहिनूर हीरा महाराजा रणजीत सिंह के पास था उन्होंने कश्मीर को अता मोहम्मद के चंगुल से आजाद करा लिया था महाराजा रणजीत सिंह जी की इच्छा थी कि वह उस कोहिनूर हीरे को जगन्नाथ पुरी के मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ जी को अर्पित करें किंतु उनकी इच्छा पूरी न हो सकी महाराजा रणजीत सिंह ने काशी के विश्वनाथ मंदिर में अथाह सोना अर्पित किया था भारतवर्ष के अनेकों मंदिरों में महाराजा रणजीत सिंह ने दिल खोलकर दान दिया था
1845 में महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने रणजीत सिंह के साम्राज्य पर आक्रमण कर दिया उस युद्ध में अंग्रेजों से हार का मुंह देखना पड़ा और वह बेशकीमती कोहिनूर हीरा अंग्रेजों ने ले लिया
कश्मीर को अता मोहम्मद के चंगुल से आजाद कराया था
पंजाब प्रांत के इस महान शासक व महान योद्धा महाराजा रणजीत सिंह के नाम पर लाल चौक का नाम महाराजा रणजीत सिंह चौक होना चाहिए महाराजा रणजीत सिंह के नाम को यह सम्मान मिलना चाहिए
अरविंद तेवतिया
अध्यक्ष मेरठ मंडल
संयुक्त व्यापार मंडल
उत्तर प्रदेश