सुशील कुमार शर्मा
स्वतंत्र पत्रकार.....✍🏻

गाजियाबाद : रुस्तम-ए-हिन्द दारा सिंह ने रेसलिंग के इतिहास में ऐसी मिसालें कायम की हैं, जो कभी भूली नहीं जा सकतीं।उनका  जन्म 19 नवंबर 1928 को हुआ था। दारा सिंह अपने ज़माने के विश्व प्रसिद्ध फ्रीस्टाइल पहलवान रहे हैं। उन्होंने 1959 में पूर्व विश्व चैम्पियन जॉर्ज गारडियान्का को पराजित करके कॉमनवेल्थ की विश्व चैम्पियनशिप  जीती थी। 1968 में वह अमेरीका के विश्व चैम्पियन लाऊ थेज को पराजित कर फ्रीस्टाइल कुश्ती के विश्व चैम्पियन  बने। उन्होंने 55 वर्ष की आयु तक पहलवानी की और पाँच सौ मुकाबलों में किसी एक में भी पराजय का मुँह नहीं देखा। 1983 में उन्होंने अपने जीवन का अन्तिम मुकाबला जीतने के बाद, कुश्ती से सम्मानपूर्वक संन्यास ले लिया था ।1960 के दशक में पूरे भारत में उनकी फ्री स्टाइल कुश्तियों  का बोलबाला रहा। बाद में उन्होंने अपने समय की मशहूर अदाकारा मुमताज़ के साथ हिन्दी की स्टंट फ़िल्मों में काम करना शुरू किया। दारा सिंह ने कई फ़िल्मों में अभिनय के अलावा, निर्देशन और लेखन भी किया। उन्हें टी.वी धारावाहिक रामायण में हनुमान के अभिनय से काफी लोकप्रियता मिली। उन्होंने पंजाबी में अपनी आत्मकथा लिखी थी, जो 1993 में हिन्दी में भी प्रकाशित हुई। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया। वह अगस्त 2003 से अगस्त 2009 तक, पूरे छ: वर्ष राज्य सभा के सांसद रहे।साल 2018 में "डब्लूडब्लूई" ने दारा सिंह को एक बेहद खास सम्मान से नवाज़ा और '"हॉल ऑफ फेम-2018'" की लैगेसी विंग में शामिल किया । 12  जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ने के बाद, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

      मुझे गर्व है कि  1980 के दशक में  जब मैं सक्रिय पत्रकारिता  कर रहा था उस समय दारा सिंह गाजियाबाद आये थे तो उनसे, उनके छोटे भाई रन्धावा से और उनके बड़े पुत्र प्रमुध्न से दिवंगत सांसद सुरेन्द्र प्रकाश गोयल के निवास पर मेरी सौहार्दपूर्ण भेंट हुई थी। तब सुरेन्द्र प्रकाश गोयल ,सुर्रो के नाम से मशहूर थे। उनके परिवार के एक भाई फिल्म लाइन में थे। वह दारा सिंह के मित्र थे। दारा सिंह के साथ सराय नजर अली स्थित उनके आवास पर हमने साथ बैठकर लस्सी भी पी थी। यह उसी समय का यादगार चित्र है। इस चित्र में मैं बीच में बैठा हूं । मेरे (सुशील कुमार शर्मा) एक ओर दारा सिंह बैठे हैं तथा दूसरी ओर उनकी सभी स्टंट फिल्मों में उनके सह कलाकार रहे पहलवान अभिनेता धनराज हैं। इस पहलवान अभिनेता को मैंने अपने विजय सुपर स्कूटर पर गाजियाबाद की सैर भी करायी थी। दारा सिंह तथा उनके साथ आये सभी पहलवानों ने गाजियाबाद आगमन पर शहीद चन्द्रशेखर आजाद व शहीद भगत सिंह की प्रतिमाओं पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उस समय सड़क पर अपार भीड़ इकट्ठी हो गई थी। दारा सिंह के साथ आए पहलवान रेलवे रोड स्थित रेनबो होटल में ठहराये गये थे। वहां भी उन्हें देखने के लिए सड़क पर अपार भीड़ इकट्ठी हो गयी थी। पहलवानों ने होटल के छज्जे में आकर भीड़ का अभिवादन भी किया था।  मैंने उस अभिनेता पहलवान को शहर घुमाकर ऐसी भीड़ के बीच से निकलकर होटल तक पहुंचाया था। दारा सिंह और उनके साथ आये पहलवानों ने तब तारा की प्याऊ के सामने स्थित मिलट्री ग्राउंड और रामलीला मैदान जी. टी. रोड पर  फ्रीस्टाइल कुश्तियों का प्रदर्शन मुकाबला किया था। देश के महान पहलवान अभिनेता दारा सिंह को उनके जन्मदिन पर नमन है। 
      
रूस्तम-ए-हिंद भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनसे जुड़ी तमाम ऐसी बातें है जिनकी छाप हमारे दिल पर है ! दारा सिंह के छोटे भाई जिन्हें लोग रंधावा के नाम से जानते थे , इन दोनों ने एक साथ पहलवानी करनी शुरू की थी  और धीरे-धीरे गांव के दंगलों से लेकर शहरों तक में ताबड़तोड़ कुश्तियां जीतकर अपने गाँव का नाम रोशन किया था ! दारा सिंह को हमेशा किंग कॉन्ग के साथ हुए उनके मुकाबले के लिए जाना जाता रहेगा !. इतिहास के सबसे हैरतअंगेज मुकाबलों में से एक इस मुकाबले में दारा सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के 200 किलो वजनी किंग कॉग को सर से ऊपर उठाया और घुमा के फेंक दिया था!  महज 130 किलो के दारा सिंह द्वारा लगाया गया ये दांव देखकर दर्शकों ने दांतो तले उंगलियां दबा ली थी !दारा  के इस दांव के बाद किंग कॉन्ग रेफरी पर चिल्लाने लगा था. उसके अनुसार यह नियमों के खिलाफ था. जब रेफरी ने दारा को ऐसा करने से रोका तो दारा ने किंग कॉन्ग को उठाकर रिंग से बाहर फेंक दिया था जो दर्शकों से महज कुछ ही कदम की दूरी पर जा कर गिरे थे ! . दारा सिंह, किंग कॉन्ग और फ्लैश गॉर्डन ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने 50 के दशक में कुश्ती की दुनिया में राज किया था. दारा और किंग कांग का मैच देखने के लिए दर्शकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ता था! दारा सिंह ने 1983 में उन्होंने अपना आखिरी मुकाबला खेला और जीत के बाद संन्यास ले लिया था. ये टूर्नामेंट दिल्ली में हुआ था.जीवनभर अपराजित रहने वाले और कुश्ती के कई दिग्गज नामों को धूल चटाने वाले दारा सिंह ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत 1952 में फिल्म संगदिल से की थी ! उन्होंने आगे जाकर कई फिल्मों में अभिनय किया और कुछ फिल्में प्रोड्यूस भी कीं. फिल्म निर्देशक मनमोहन देसाई ने एक बार उनके लिए कहा था कि मैं अमिताभ बच्चन को लेकर फिल्म मर्द बना रहा था और मैं सोच रहा था कि उनके पिता का रोल कौन निभा सकता है? मुझे लगा कि अगर मैं अमिताभ को मर्द की भूमिका में ले रहा हूं तो जाहिर है मर्द का बाप तो दारा सिंह ही होना चाहिए ..! दारा सिंह मे बॉलीवुड के टॉप सितारों के साथ काम किया था!  दारा सिंह ने कई बड़ी फिल्मों जैसे- मेरा नाम जोकर, अजूबा, दिल्लगी, कल हो न हो और जब वी मेट जैसी फिल्मों में काम किया था. उन्होंने कई हिंदी और पंजाबी फिल्में बनाई जिसमें उन्होंने खुद मुख्य भूमिका निभाई थी!. 1980 और 90 के दशक में दारा सिंह ने टीवी का रूख किया था!. अपने समय के ऐतिहासिक सीरियल रामायण में हनुमान जी की भूमिका निभाकर वे घर-घर में पहचाने जाने लगे . खेल और सिनेमा के अलावा दारा सिंह ने राजनीति में भी हाथ आजमाया!  वे देश के पहले खिलाड़ी थे जिन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया था।
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