◼1 करोड़ 93 लाख 43 हजार 872 रुपये का रिकार्ड जुर्माना वसूलकर किया नगर निगम पर्यावरण में अपेक्षित सुधार


कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार


गाजियाबाद :-
        देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शुमार किये जाने वाले गाजियाबाद महानगर की आबोहवा को सुुधारने और नगर निगम, गाजियाबाद क्षेत्र के पर्यावरण को दुरुस्त रखने के नजरिए से भी नगर आयुक्त के रूप में डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने निर्णायक और बेहद सख्त कदम उठाए, जिससे बढ़ते प्रदूषण का ग्राफ नियंत्रित हुआ। एनजीटी की सक्रियता के मद्देनजर ग्रासरूट पर नगर आयुक्त ने ऐसे व्यवहारिक फैसले लिए, कि पर्यावरण अनुकूलन को इससे बहुत बड़ी मदद मिली। कई पार्किंग माफियाओं को भी उन्होंने नगर निगम क्षेत्र से इस कदर खदेड़ा की सबकी बोलती बंद हो गई। नियम-कानून के बेहद पायबन्द नगर आयुक्त इस लिहाज से भी नगरवासियों के दिल में वे रचे-बसे रहेंगे।

नगर निगम रिकार्ड के मुताबिक, नगर आयुक्त डॉ दिनेश चंद्र के महज 18 महीने के कार्यकाल में खुले में प्लास्टिक कचरा व कूड़ा जलाने, पॉलीथिन व अन्य प्लास्टिक उत्पादों को नालियों में बहाने, खुले में निर्माण सामग्री फैलाये रखने, यत्र-तत्र गंदगी फैलाने, खुले में शौच-लघुशंका पर पाबंदी लगाने, नालियों में गोबर बहाने वाले अवैध डेयरी संचालकों आदि के विरुद्ध न केवल लगभग 1 करोड़ 93 लाख, 43 हजार 872 रुपये से अधिक के भारी अर्थदंड लगवाए गए, बल्कि नगर निगम सीमान्तर्गत 106 स्थानों पर आग लगने के सम्बन्ध में 14 व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु सम्बंधित थाने में तहरीर दी गई है। बताया जाता है कि नगर आयुक्त के इस कदम से महानगर के पर्यावरण में अपेक्षित सुधार महसूस किया जा रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक, नगर निगम के पांचों जोनों में 1 लाख 11 हजार 332 किलोग्राम प्रतिबंधित पॉलीथिन जब्त की गई और इसके उपयोगकर्ताओं से 1 करोड़ 27 लाख 88 हजार 890 रुपये बतौर जुर्माना वसूला गया। वहीं, खुले में निर्माण सामग्री रखने पर 12 लाख 56 हजार 900 रुपए, इधर-उधर गंदगी करने पर 23 लाख 79 हजार 938 रुपये, यहां-वहां आग लगाकर कूड़ा जलाने पर 9 लाख 74 हजार 200 रुपए, खुले में शौच या लघुशंका करने पर 65 हजार 312 रुपये और यत्र-तत्र अतिक्रमण करने पर 14 लाख 41 हजार 800 रुपये जुर्माना वसूला गया। इन पांच मदों में 61 लाख 18 हजार 150 रुपये का जुर्माना वसूल हुआ। वहीं, अवैध डेयरी संचालकों के विरुद्ध की गई सख्त कार्रवाई में 3 लाख 25 हजार 500 रुपये का अर्थदंड वसूला गया। कुल मिलाकर 1 करोड़ 93 लाख, 43 हजार, 872 रुपए का अर्थदंड वसूला गया।

यदि प्रतिबंधित पॉलीथिन की जब्तीकरण और अधिरोपित जुर्माना की बात जोनवार किया जाए तो सिटी जोन से 34 हजार 431.8 किलोग्राम सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त करते हुए 10 लाख 84 हजार 350 रुपये का जुर्माना वसूला गया। वहीं, कविनगर जोन से 50 हजार 427.54 किलोग्राम पॉलीथिन जब्त करते हुए 16 लाख 97 हजार 150 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया। इसी प्रकार, मोहननगर जोन से 22 हजार 515.35 किलोग्राम प्लास्टिक थैली जब्त करते हुए 18 लाख 61 हजार 590 रुपये जुर्माना वसूला गया। वहीं, वसुंधरा जोन से 2 हजार 193.6 किलोग्राम पॉलीथिन जब्त करते हुए 78 लाख 83 हजार 700 रुपए जुर्माना लिया गया। जबकि विजयनगर जोन से 1 हजार 763.9 किलोग्राम पॉलीथिन जब्त करते हुए 2 लाख 62 हजार 100 रुपए जुर्माना वसूला गया।

वहीं, खुले में निर्माण सामग्री रखने पर लगाये गए जुर्माने की यदि बात की जाए तो सिटी जोन में ऐसा एक भी मामला प्रकाश में नहीं आया। वहीं कविनगर जोन में 3 लाख 22 हजार रुपए, मोहननगर जोन में 3 लाख 8 हजार 500 रुपए, वसुंधरा जोन में 6 लाख 12 हजार 900 रुपए तथा विजयनगर जोन में 13 हजार 500 रुपये इस मद में वसूले गए। जबकि, गंदगी करने पर सिटी जोन में 7 लाख 27 हजार 830 रुपये, कविनगर जोन में 1 लाख 46 हजार 158 रुपये, मोहननगर जोन में 9 लाख 1 हजार 550 रुपए, वसुंधरा जोन में 4 लाख 93 हजार 700 रुपए और विजय नगर जोन में 1 लाख 10 हजार 700 रुपये बतौर जुर्माना वसूला गया।

इसी प्रकार, आग लगाकर कूड़ा जलाने के मामले में सिटी जोन में 2 लाख 55 हजार, कविनगर जोन में 2 लाख 23 हजार, मोहननगर जोन में 2 लाख 8 हजार 500, वसुंधरा जोन में 2 लाख 58 हजार 500 और विजयनगर जोन में 29 हजार 200 रुपये बतौर जुर्माना वसूला गया। वहीं, खुले में शौच व लघुशंका करने पर सिटी जोन में 11 हजार 500 रुपए, कविनगर जोन में 7 हजार 550 रुपए, मोहननगर जोन में 14 हजार 910 रुपए, वसुंधरा जोन में 23 हजार 252 रुपए और विजयनगर जोन में 8 हजार 550 रुपए बतौर जुर्माना वसूल किया गया।

वहीं, नगर निगम की भूमि या सड़क पर अतिक्रमण करने वालों से सिटी जोन में 2 लाख 41 हजार 600 रुपए, कविनगर जोन में 4 लाख 22 हजार 200 रुपये, मोहननगर जोन में 3 लाख 30 हजार 500 रुपए, वसुंधरा जोन में 2 लाख 52 हजार 700 रुपए और विजयनगर जोन में 1 लाख 94 हजार 800 रुपये बतौर जुर्माना वसूला गया। स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी सख्त और रणनीतिक कार्रवाई से जहां आमलोगों में गाजियाबाद नगर निगम की छवि सुधरी, वहीं अर्जित जुर्माना से नगर निगम क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण पर अधिक व्यय करना सम्भव हो सका। यदि वजह है कि नगर आयुक्त के रूप में डॉ दिनेश चंद्र सिंह गाजियाबाद वासियों को बहुत याद आएंगे।
Previous Post Next Post