सिटी न्यूज़ हिंदी
सुशील शर्मा की कलम से 🖋️



गाजियाबाद :-
        यह हाल है नेहरू नगर द्वितीय ,सी-ब्लाक के पार्क का  जो मेन रोड पर नरेंद्र मोहन हॉस्पिटल के सामने पंजाब नेशनल बैंक की बिल्डिंग के साथ है। रात्रि में यह रिक्शेवालों द्वारा जनसुविधाओं के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसका गेट , फ्रंट की दीवार, रेलिंग सब तोड दिए गए हैं। अन्दर के झूले भी कबाड़ियों ने उखाड़ कर बेच दिए हैं। जो नहीं उखड़े वह टूटे फ़ूटे पड़े हैं। पीछे कुछ दीवार गाजियाबाद पब्लिक स्कूल की इस पार्क के साथ पड़ती है उन्होंने स्वयं अपनी दीवार तोड रखी है।जब भी इस स्थल के पास से गुजरना होता है ,उस स्थल के पत्रकारों से जुड़े इतिहास का स्मरण  हो जाता है। 
         
यह तब की बात है जब यह जगह गाजियाबाद विकास प्राधिकरण  के पास थी तब इसे गाजियाबाद जर्नलिस्ट्स क्लब के अनुरोध पर पत्रकारों को प्रेस- क्लब के लिए दे दिया गया था। इससे पहले पत्रकारों को प्रेस क्लब के लिए पटेल नगर प्रथम में अग्रसेन भवन के सामने स्थित कम्युनिटी सेंटर उपयोग के लिए दिया गया था। वहां जीडीए ने कुछ मेज-कुर्सी भी डलवा दी थी।

गाजियाबाद जर्नलिस्ट्स क्लब की मीटिंग व   कुछ आयोजन हाल में व खुले में भी वहां हुए। लेकिन वहां जगह  की कमी और असुविधा की बात तत्कालीन जीडीए उपाध्यक्ष  से की तो उन्होंने पत्रकारों को प्रेस- क्लब  के लिए नेहरू नगर का यह पार्क- स्थल दे दिया। पार्क के साथ ही उस जमाने में नगर पालिका के सदस्य नरेश का आवास था उसके अनुरोध पर पार्क की जमीन में से ही सड़क के लिए जमीन काटकर दे दी गयी।  

प्रेस क्लब के लिए जगह मिल जाने से उत्साहित पत्रकारों ने पार्क के अन्दर की दीवारों पर पेंटर से अपने- अपने अखबारों के प्रचार भी लिखवाये। एक पत्रकार ने वहां चाय की कैंटीन भी चालू कर दी थी। तमाम पत्रकारों को साथ लेकर चलना था इसलिए ग्रुपबाजी शुरू हो गयी। कुछ पत्रकारों ने चन्दा इकट्ठा करना शुरू कर दिया। किसी के द्वारा चन्दे में सीमेंट के कुछ कट्टे भी किसी से ले लिये गये। इन्हीं बातों से क्षुब्ध हो  

गाजियाबाद जर्नलिस्ट्स क्लब ने इसमें रूचि लेना बंद कर दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि  कुछ गैर जिम्मेदार पत्रकारों के कारण गाजियाबाद के पत्रकार प्रेस- क्लब बनने से पहले ही अलग-अलग गुट में बंट गये और  फिर उसके बाद प्रेस- क्लब का मुद्दा ठंडा पड गया। जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की शुरुआत हुई तो कलेक्ट्रेट परिसर में सूचना विभाग के समीप प्रशासन ने  उनके लिए मीडिया सैंटर की स्थापना करायी। जो आज भी चैनलों से जुड़े पत्रकारों का एकमात्र प्रमुख केन्द्र है।
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