रिपोर्ट :- अजय रावत

गाज़ियाबाद :- करोड़ों कमजोर वर्गों के नेता, भारत रत्न, सामाजिक न्याय के ध्वज वाहक, कानूनविद, महान अर्थशास्त्री, संविधान निर्माता बाबा साहेब ड़ा. अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित कर चित्र पर पुष्प अर्पित कर सत्योदय बुद्ध विहार, ड़ा.अंबेडकर पार्क परिसर लाजपत नगर साहिबाबाद में स्मरण किया, सैकड़ों अनुयायियों ने बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की, और उनके द्वारा बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया, कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट के संस्थापक/अध्यक्ष शिक्षाविद राम दुलार यादव रहे, अध्यक्षता श्याम नारायण अध्यक्ष ड़ा. अंबेडकर जन कल्याण समिति उ0 प्र0 ने, संचालन महासचिव राज कुमार ने किया। कार्यक्रम को ड़ा अशोक कुमार, डीपी मौर्य, सुरेन्द्र चन्देल, ड़ा पी लाल, धनपत, कवि ओपी गौतम, ने भी संबोधित किया।
         
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षाविद राम दुलार यादव ने कहा कि ड़ा0 भीम राव अंबेदकर महान विद्वान, विधि विशेषज्ञ, महान अर्थशास्त्री, समाज सुधारक, बेजोड़ राजनीतिज्ञ, सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत, भारत रत्न, श्रमिकों, किसानों, महिलाओं, शोषितों, वंचितों, पिछड़ों के अधिकारों के लिए लगातार देश, समाज को जागृत करने वाले, संविधान निर्माता, भारत के प्रथम कानून मंत्री रहे, उन्होने लोगों को शिक्षा, संगठन और संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया, उनका कहना था कि “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पियेगा, वही दहाड़ेगा” । अपने मौलिक अधिकारों को प्राप्त करने, गौरवपूर्ण जीवन जीने के लिए संघर्ष करो, यह तभी संभव होगा जब आप अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझते हुए संगठित रहेंगे। उन्होने कहा है कि मै ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतन्त्रता, समानता और भाईचारा सिखाये क्योकि हिन्दू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्र विचार के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। 

26 जनवरी 1950 में जब भारत का संविधान लागू हुआ तो उन्होने कहा कि हमे राजनीतिक आजादी तो मिली लेकिन सामाजिक और आर्थिक असमानता की स्थिति गंभीर है, जब तक सामाजिक और आर्थिक असमानता रहेगी, राजनीतिक गणतन्त्र मजबूत नहीं होगा, लेकिन आजादी के 75 साल बाद भी सामाजिक गैरबराबरी और आर्थिक रूप से लोगों को आत्म निर्भर नहीं कर पाये, आक्स फेम 2023 की रिपोर्ट के अनुसार 1 प्रतिशत अमीर 40 प्रतिशत लोगों से ज्यादा संपत्ति के मालिक है, 2020 में अरब पतियों की तादात 100 थी, वहीं 2022 में यह बढ़कर 166 हो गयी, कुछ लोगों की संपत्ति में भारी वृद्धि है तो दूसरी ओर करोड़ों लोग गरीबी का दंश झेलने के लिए अभिशप्त है, संविधान में असमानता दूर करने के स्पष्ट निर्देश है, भयावह स्थिति यह है कि 64% जी0एस0टी0 50 प्रतिशत गरीब आदमी और सबसे कम 10% अमीर दे रहा है, देश का निर्धन वर्ग अप्रत्यक्ष कर की चपेट में आ गया है।

भारत में आर्थिक असमानता तभी दूर होगी जब उपेक्षित और वंचित वर्ग के बच्चों को पूर्ण शिक्षा और रोजगार के साधन सुलभ हों, ड़ा0 अंबेदकर ने कहा है कि मैंने कड़ी मेहनत कर पवित्र और अच्छा संविधान बनाया, लेकिन इसे संचालित करने वालों की नीयत अगर ठीक नहीं होगी, तो यह मात्र एक किताब ही रह जाएगा। इस पर विचार करने की आवश्यकता है। पं0 जवाहर लाल नेहरू ने कहा है कि अगर पूंजीवादी शक्तियों को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह अमीर को और अमीर, गरीब को और गरीब बना देगी। यहाँ ड़ा.अंबेडकर और पंडित जवाहर लाल नेहरू के विचार में समानता है, आज देश में महापुरुषों के दिए प्रेरणा दायक संदेश का मज़ाक उड़ाया जा रहा है।
         
समारोह में प्रमुख लोगों ने श्रद्धांजलि दी, राम दुलार यादव, ड़ा0 अशोक कुमार, डी0पी0 मौर्य, सुरेन्द्र चन्देल, ड़ा0 पी0 लाल, धनपत जी, कवि ओ0पी0 गौतम, मनोज कुमार, रमेश गौतम, ब्रह्म प्रकाश, जगन चंद प्रकाश, रमेश कुमारी, मनमोहन कुमार, मयंक गौतम आदि।
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